जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
चारि भुजा तनु श्याम विराजै।
चारि भुजा तनु श्याम विराजै।
माथे रतन मुकुट छवि छाजै॥
परम विशाल मनोहर भाला।
परम विशाल मनोहर भाला।
टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥
कुण्डल श्रवण चमाचम चमके।
कुण्डल श्रवण चमाचम चमके।
हिये माल मुक्तन मणि दमके॥
कर में गदा त्रिशूल कुठारा।
कर में गदा त्रिशूल कुठारा।
धन सम्पत्ति नष्ट करावैं।।
दृष्टि पड़े जो कोपि भईहै।
दृष्टि पड़े जो कोपि भईहै।
राजाधिराज भिखारी बन जाहै॥
ग्रहण करे जो को निज कर में।
ग्रहण करे जो को निज कर में।
दुःख दरिद्र सबहुँ लेहि तन में॥
जो यह शनि का नाम सुनावै।
जो यह शनि का नाम सुनावै।
मन कामना अति शीघ्र पावै॥
शनिदेव को चढ़ावहिं तेल।
शनिदेव को चढ़ावहिं तेल।
कष्ट मिटै तन के सभ सैल॥
शनिवार को व्रत रह कर।
शनिवार को व्रत रह कर।
हनुमान को चढ़ावहिं सिन्दूर॥
पीपल को पेड़ करे पूजा।
पीपल को पेड़ करे पूजा।
सब विघ्न टलैं तुरंत सदा॥
कौवा काग भुजंगा विषधारी।
कौवा काग भुजंगा विषधारी।
शनिदेव के ये सबहिं दास प्यारे॥
कहा गया है शास्त्रों में।
कहा गया है शास्त्रों में।
शनिदेव से बड़़ा न कोई॥
न्याय करते हैं कर्म फल।
न्याय करते हैं कर्म फल।
दुष्टन को देते हैं दुःख॥
भक्तों की रक्षा करते हैं।
भक्तों की रक्षा करते हैं।
संकट टालते हैं शीघ्र॥
॥ दोहा ॥
दास रामदास जो कहता है।
॥ दोहा ॥
दास रामदास जो कहता है।
शनिदेव की कृपा से सुख होता है॥
सब पढ़हिं सुनहिं ये चालीसा।
सब पढ़हिं सुनहिं ये चालीसा।
शनिदेव प्रसन्न हों सब कलिषा॥
दोष हो तो कृपा करि माहीं।
दोष हो तो कृपा करि माहीं।
श्री शनि चालीसा संपूर्ण करी॥
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