सुंदरकांड का महत्व

राम भक्त हनुमान जी को बल, बद्धि और भक्ति प्रदान करने वाले माने जाते हैं। चाहे हनुमान चालीसा हो या सुंदरकांड इन दोनों का ही पाठ करने से व्यक्ति को जीवन में कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते हैं। जो भी जातक प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करता है उसकी एकाग्रता में वृद्धि होती है और वह आत्मविश्वास से भर जाता है। जिस तरह अपनी शक्तियों को याद करके हनुमान जी ने बड़े-बड़े कार्यों का आसानी से पूरा कर दिया था उसी तरह सुंदरकांड के पाठ करने से व्यक्तियों को अपनी वास्तविक शक्तियों का पता चलता है। अपनी वास्तविक शक्तियों को जानकर व्यक्ति कई बाधाओं से पार पा जाता है। सुंदरकाण्ड के पाठ करने से मानसिक रुप से भी व्यक्ति मजबूत होता है और विरोधियों को परास्त करता है। सिर्फ यही नहीं सुंदरकांड व्यक्ति के अंदर सकारात्मक भावनाओं को भी पैदा करता है और इसका पाठ करने से व्यक्ति समाज के लिये अच्छे काम करने के प्रति भी प्रेरित होता है। यही वजह है कि पंडित और ज्योतिषाचार्य भी लोगों को सुंदर कांड का पाठ करने की सलाह देते हैं।
सुंदरकांड का पाठ कुंडली के मारक ग्रहों को करता है शांत
सुंदरकांड के पाठ से कुंडली में मौजूद बुरे ग्रहों का प्रभाव भी कम हो जाता है। सुंदर काण्ड का पाठ मंगलवार और शनिवार के दिन करने से मंगल और शनि ग्रह शांत हो जाते हैं। सुंदर कांड का पाठ करने से शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती के दौरान भी आप कई परेशानियों से बच सकते हैं। इसके साथ ही राहु-केतु जैसे बुरे ग्रहों के दुष्परिणामों को दूर करने के लिये भी सुंदरकांड का पाठ किया जा सकता है।
सुंदरकांड का नियमित पाठ करने से आपके अंदर की नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं। इस पाठ को करने से आपके घर में भी भूत-प्रेत से जुड़ी कोई बाधा नहीं होती। सुंदरकांड का पाठ करना न केवल आपके लिये बल्कि आपके घर में रहने वाले सभी सदस्यों के लिये लाभकारी सिद्ध होता है। सुंदरकांड का पाठ यदि आप नियमित रुप से ना भी कर पाएं तो सप्ताह में एक दिन तो अवश्य करना चाहिये।

सुंदरकांड पाठ करने की विधि

सुंदरकांड का पाठ करने की कोई विशेष विधि नहीं है, यदि आपके मन में श्रद्धा है तो आप सुबह और शाम के समय पवित्र मन से इसका पाठ कर सकते हैं। हालांकि यदि सुंदर कांड- का पाठ किसी विशेष लाभ की प्राप्ति के लिये कर रहे हैं तो नीचे दी गई विधि के अनुसार आपको सुंदर कांड का पाठ करना चाहिये।सुंदरकांड का पाठ यदि किसी विशेष फल की प्राप्ति के लिये कर रहे हैं तो शुरुआत मंगलवार या शनिवार के दिन से करें।
  • सुंदरकांड को शुरु करने से पहले स्नान ध्यान करें और स्वच्छ कपड़े धारण करें।
  • इसके बाद किसी मंदिर में या फिर घर के पूजा स्थल पर हनुमान जी की मूर्ति स्थापित करें।
  • हनुमानजी के साथ-साथ आप मंदिर में भगवान राम और माता सीता की प्रतिमा या तस्वीर भी स्थापित कर सकते हैं।
  • इसके बाद हनुमान जी को फूल-फल इत्यादि अर्पित करें।
  • सुंदर काण्ड शुरु करने से पहले गणेश जी की पूजा करें।
  • जिस उद्देश्य से आप सुंदरकांड का पाठ कर रहे हैं उसके पूरा होने की कामना करते हुए सुंदरकांड का पाठ करें।
  • सुंदरकांड का पाठ करते समय मन को भटकने न दें।
  • जिस दिन भी आप सुंदरकांड का पाठ करें उस दिन वासना जनित विचारों को मन में न आने दें और नाही वासना के वसीभूत होकर कोई काम करें।
  • इसके साथ ही सुंदरकांड का पाठ करने वाले को मांस-मदिरा जैसे मादक पदार्थों का सेवन भी नहीं करना चाहिये।

सुंदरकांड नाम कैसे पड़ा

जैसा कि सुंदरकांड में भगवान हनुमान जी के लंका जाने का जिक्र है। लंका तीन पर्वतों सुबैल, नील और सुंदर पर्वतों के बीच बसी थी। इन तीन पर्वतों को ही त्रिकुटाटल पर्वत भी कहा जाता है। इन तीनों में से सबसे चर्चित पर्वत सुंदर पर्वत था क्योंकि यहां अशोक वाटिका स्थित थी। जब हनुमानजी लंका पहुंचे थे तो इसी वाटिका में उनकी भेंट माता सीता से हुई थी यही कारण है कि इस पूरे घटनाक्रम को सुंदरकांड नाम दिया गया है।

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