जो मनुष्य इस श्रेष्ठ दुर्लभ व्रत को करेगा, श्री सत्यनारायण भगवान की कृपा से उसे धन-धान्य कोई अभाव नहीं होगा। निर्धन, धनी एवं बन्दी, बन्धनों से मुक्त होकर निर्भय हो जाता है। सन्तानहीन को सन्तान प्राप्त होती है तथा समस्त इच्छायें पूर्ण कर अन्त में वह बैकुण्ठ धाम को जाता है।
अब उनके विषय में भी जानिये, जिन्होंने पहले इस व्रत को किया, अब उनके दूसरे जन्म की कथा भी सुनिये।
शतानन्द नामक वृद्ध ब्राह्मण ने सुदामा के रूप में जन्म लेकर श्रीकृष्ण की भक्ति एवम् सेवा कर बैकुण्ठ प्राप्त किया। उल्कामुख नामक महाराज का राजा दशरथ के रूप में जन्म हुआ तथा वह श्री रङ्गनाथ भगवान का पूजन कर मोक्ष को प्राप्त हुये। साधु नाम के वैश्य ने धर्मात्मा तथा सत्यप्रतिज्ञ राजा मोरध्वज बनकर अपने पुत्र को आरे से चीरकर बैकुण्ठ धाम प्राप्त किया। महाराज तुङ्ग्ध्वज स्वयम्भू मनु बने तथा उन्होंने बहुत से लोगों को भगवान की भक्ति में लीन कराकर बैकुण्ठ धाम प्राप्त किया। लकड़हारा अगले जन्म में गुह नामक निषाद राजा बना, जिसने भगवान राम के श्री चरणों की सेवा कर अपने सभी जन्मों का उद्धार कर लिया।
॥ इति श्री सत्यनारायण व्रत कथा पञ्चम अध्याय सम्पूर्ण ॥
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
We appreciate you contacting us
Have a great day!