भक्तों को पूजा के दिन व्रत का पालन करना चाहिये। प्रातःकाल तथा सन्ध्याकाल में भी पूजा की जा सकती है। हालाँकि सन्ध्या के समय सत्यनारायण पूजा करना अधिक उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि भक्त सायँकाल में प्रसाद के द्वारा व्रत खोल सकते हैं।
श्री सत्यनारायण पूजा कथा, विधि, सामग्री
भक्तों को पूजा के दिन व्रत का पालन करना चाहिये। प्रातःकाल तथा सन्ध्याकाल में भी पूजा की जा सकती है। हालाँकि सन्ध्या के समय सत्यनारायण पूजा करना अधिक उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि भक्त सायँकाल में प्रसाद के द्वारा व्रत खोल सकते हैं।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
Benifits of chalisa, हिंदू धर्म में चालीसा क्या है?
चालीसा शब्द की उत्पत्ति चालिस शब्द से हुई है, जिसका अर्थ अंकों में 40 है। चालीसा एक भक्ति गीत हैं। चालीसा में 40 (४०) चौपईयाँ होती है। चालीस...


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
We appreciate you contacting us
Have a great day!